कहीं आप फेक न्यूज़ की भट्ठी में नफरतबाज तो नहीं बन रहे हैं?, ऐसे करें पहचान

कहीं आप फेक न्यूज़ की भट्ठी में नफरतबाज तो नहीं बन रहे हैं?, ऐसे करें पहचान

इस्लाहुद्दीन अंसारी
अगर चीज़ों को परखने, समझने और पहचानने की क्षमता आपके अंदर नहीं है तो सोशल मीडिया नाम की इस चरस से खुद को अलग-थलग कर लीजिये। फेक़ स्क्रीनशॉट, फेक़ अकाउंट, फेक़ न्यूज़ लिंक और फेक़ इमेज/वीडियो देखकर और उस पर यकीन करके फौरन आवेश में आ जाना और भक्त टाईप प्रतिक्रिया देना शुरू कर देने से बेहतर है की आप इस कथित डिजिटल क्रांति से दूर रहे।

आपके हित में समाज के हित में और दो कदम आगे बढ़कर कहूँ तो देश-हित में ये आपका बेहतरीन फैसला होगा। या फ़िर अगर इस सोशल-समाज का हिस्सा बनकर रहना चाहते हैं तो बेहतर है की कुछ बातें और चीजें अपने ज़हन में बिठाकर इसे समझ ले और जब तक़ ये चीजें पूरी तरह से समझ नहीं पा रहे हैं तब तक सोशल मिडिया के किसी भी प्लेटफार्म पर किसी भी किस्म की प्रतिक्रिया देने से ख़ुद को रोक कर रखें।

सोशल मीडिया पर एक जिम्मेदार यूज़र की हैसियत से बने रहना चाहते हैं तो सबसे पहले तो फेक़ अकाउंट, फैन अकाउंट और व्यक्ति विशेष के रियल अकाउंट के बीच के अंतर को बहोत अच्छी तरह से समझ लीजिये……

रियल आफीशियल अकाउंट
कोई भी व्यक्ति अगर वो साधारण व्यक्ति है तो सोशल मीडिया पर उस व्यक्ति के अकाउंट के साथ उसकी ओरिजनल तस्वीर के साथ-साथ बहोत सारी जरूरी जानकारी संतोषजनक जवाब के साथ साझा की जाती है। जैसे की वो किस जगह का रहने वाला है, उसने पढ़ाई कहाँ से की है, और वो क्या करता है वगैरह। संबंधित अकाउंट असली ही इसे और अच्छी तरह से जांचने के लिये आप उस अकाउंट की टाईमलाईन पर जाकर व्यक्ति द्वारा साझा की गयी तस्वीरें, पोस्ट और उसकी दूसरी एक्टिविटी का अध्यन कर सकते हैं। उसकी तस्वीरों और पोस्टों पर आई प्रतिक्रिया भी आपको उसके विषय सही राय बनाने में मददगार साबित हो सकती है।

किसी सेलिब्रिटी, प्रतिष्ठित या विशिष्ट व्यक्ति के पहचान के लिये सोशल मीडिया के तीनों प्रमुख प्लेटफॉर्म पर ब्लू-टिक/सत्यापान की सुविधा उपलब्ध है। यानि फेसबुक/ट्विटर/इंस्टाग्राम के इन विशिष्ट अकाउंट में व्यक्ति विशेष के नाम के बाजू से आपको एक ब्लू-टिक नज़र आयेगा जो ये प्रमाणित करता है की संबधित अकाउंट सत्यापित तौर पर असली है। बहोत हद तक़ मुमकिन है की सत्यापन की शर्तों को पूरा ना करने की वज़ह से बहोत सारे विशिष्ट लोगों के अकाउंट में आपको ब्लू-टिक ना नज़र आये तब ऐसी स्थित में आपको उसके पहचानने में थोड़ी सी परेशानी ज़रूर पेश आ सकती है पर कुछ चीज़ें ध्यान में रखकर इन अकाउंट्स को भी आसानी से पहचाना जा सकता है। इसके लिये भी आप संबधित अकाउंट के टाईमलाईन पर जाकर उसके द्वारा साझा की गयी तस्वीरों/पोस्टों और उन पर आई प्रतिक्रयाओं के आधार पर आसानी से अंदाज़ा लगा सकते हैं संबधित अकाउंट्स को फाॅलो करने वाले लोगों का आंकलन कर के भी आप संबधित अकाउंट का सत्यापन आसानी से कर सकते हैं।

फैन अकाउंट
ये वो अकाउंट होते हैं जो किसी सेलिब्रिटी, प्रतिष्ठित या विशिष्ट व्यक्ति के फाॅलोअर्स या समर्थक के द्वारा बनाये जाते हैं। यहां ये बात जान लेनी बहोत ज़रूरी है की इन अकाउंट्स का संबधित व्यक्ति से कोई सरोकार नहीं होता सिवाय इसके की वो उसके नाम के साथ बनाये जाते हैं और ना ही इन पर शेयर की गई सामग्रियों से उसका कोई संबध होता है और ना ही इससे की गयी टिप्पणियां संबधित व्यक्ति की व्यक्तिगत टिप्पणी होती है। ये अकाउंट कुछ इस तरह से होते हैं “Stand With Ravish Kumar” I Support Ravish Kumar” “Ravish Kumar Fan’s Club” “बेबाक़ पत्रकार रवीश कुमार” वगैरह वगैरह और वगैरह यानि की इन फैंस अकाउंट पर संबधित व्यक्ति के नाम के साथ समर्थन या तारीफ़ के लिये इस्तेमाल किये गये दूसरे और भी कयी किस्म के शब्द हो सकते हैं। यहां एक बार फिर ये बात स्पष्ट करता चलूँ की ऐसे फैंस अकाउंट पर शेयर की गयी सामग्रियों और की गयी टिप्पणियों का संबधित व्यक्ति से किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं होता है।

फेक़ अकाउंट
ये वो अकाउंट होते हैं जो या तो संबधित व्यक्ति की शोहरत और लोकप्रियता को भंजाने के लिये बनाये जाते हैं या फिर संबधित व्यक्ति को बदनाम करने या फिर उसके ख़िलाफ़ लोगों की राय को बदलने के लिये या फिर उसके प्रति लोगों को बरगलाने के लिये बनाये जाते हैं। ऐसे अकाउंट से अनर्गल और बेबुनियाद पोस्टें करके उनके स्क्रीनशॉट के माध्यम से व्यक्ति विशेष के ख़िलाफ़ लोगों को भड़का कर उसका राजनैतिक लाभ लेने की कोशिशें भी इस समय चरम पर हैं। ज्ञात हो की फैंस अकाउंट के ख़िलाफ़ ना तो सोशल मीडिया कंपनियां कोई एक्शन लेती हैं और ना ही ये कानूनन अपराध है पर फेक़ अकाउंट के लिये कानून और कंपनियों दोनों के पास प्रावधान है कंपनी के पास शिकायत करने पार ये अकाउंट बंद कर दिये जाते हैं और इसके संबध में पुलिस में शिकायत भी की जा सकती है।

दूसरा सोशल मीडिया पर फेक़ न्यूज़, फोटोशाप विडियो और इमेज और भ्रामक सामग्रियों के सहारे नफ़रत फैलाने या किसी राजनैतिक पार्टी किसी विचारधारा को फायदा और नुकसान पहुंचाने के तिलिस्म को समझिये और इससे खूद को बाहर निकालिये।

फर्जी न्यूज़ पोर्टल
न्यूज़ पोर्टल होने का मतलब ये नहीं होता की उसके द्वारा शेयर की गयी ख़बर पर आंख बंद करके यकीन कर लिया जाये। डिजिटल क्रांति के इस दौर में महज़ कुछ हज़ार रुपये खर्च करके कोई भी व्यक्ति जिसे थोड़ा बहोत भी इस सब बारे में ज्ञान है वो अपने फायदे के लिये इस फेक़ न्यूज़ फैक्ट्री का हिस्सा बन जाता है और उसके बाद हिट और व्यूज़ पाने के चक्कर में कुछ भी अनर्गल और तड़कती भड़कती चीज़ों को ख़बर बनाकर परोसना शुरू कर देता है और बेचारे भोले भाले लोग़ बिना तहकीक़ किये उनके इस जाल में फंसकर बिना किसी रुकावट के उन्हें उनके मक़सद में कामयाब हो जाने देते हैं। इसे रोकने के लिये ज़रूरी है की कोई भी न्यूज़ लिंक आगे बढ़ाने से पहले उसकी विश्वसनीयता ज़रूर जांच परख लीजिये की संबधित खबर को दूसरे किसी विश्वसनीय पोर्टल ने भी शेयर किया है या नहीं या ऐसी कोई चीज़ घटित हुई भी है नहीं आप गूगल पर जाकर भी फैक्ट चैक कर सकते हैं और पूरी तरह से संतुष्ट हो जाने के बाद ही उसे आगे बढायें अन्यथा उसे वहीं रोक़ दें।

फोटोशाप इमेज/स्क्रीनशॉट
ज़्यादातर देखा जाता है की किसी एडिटेड इमेज में कोई भी झूठी बात किसी भी व्यक्ति के नाम या तस्वीर के साथ एडिट करके उसे ये कहकर वायरल करा दिया जाता है की ये संबधित व्यक्ति का बयान है या उसने ऐसा कहा है। जबकि बवाल होने के बाद और जांच पड़ताल करने के बाद हमेशा ये चीजें झूठी पायी जाती है पर तब तक़ देर हो चुकी होती है। इस रोकने के लिये ज़रूरी है की आप संबधित सामग्री पर तब तक़ यकीन करके उसे आगे ना बढ़ायें जब तक उस एडिटेड तस्वीर पर उस बयान या टिप्पणी का कोई आधिकारिक श्रोत ना लिखा हो। और उस श्रोत को गूगल पर जाकर सत्यापित ना कर लिया जाये। बिना श्रोत और सत्यापित किये बगैर किसी भी ऐसे इमेज को आगे मत बढ़ाईये जो बिना किसी श्रोत के सिर्फ़ फोटोशाॅप द्वारा तैयार करके किसी भी व्यक्ति के नाम से वायरल कराये जा रहे हों।

भ्रामक वीडियो/सामग्रियां
कहीं अन्य जगह घटित किसी अन्य वीडियो को कहीं और का बताकर और किसी और संदर्भ के साथ वाट्सएप, फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर के सहारे वायरल करना भी एक आम सी बात हो गयी है। सोशल मीडिया की इस भेड़चाल में किसी को इतनी भी फुर्सत नहीं रहती की एक बार ये चैक कर ले की जो वीडियो वो शेयर कर रहा है वो झूठी और भ्रामक होने के साथ-साथ जन-भावनाओं को भड़काने वाली भी है। एक ही वीडियो को बार-बार अलग-अलग जगह और अलग-अलग संदर्भ में शेयर कराकर लोगों की भावनाओं को भड़काने के इस गोरखधंधे पर विराम अगर लग सकता है तो सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारी जागरुकता, संयम और समझदारी से ही लग सकता है वर्ना तो ये चीज़ें किसी ख़तरनाक वायरस की तरह हमें लगातार बीमार और बहोत बीमार करती चली जाएंगी।

लिहाज़ा जरूरी हो गया है की इस भेड़चाल का हिस्सा मत बनिये जो अंजाने में आपसे किसी को हत्यारा और उन्मादी बना रहा है, एक हत्यारी भीड़ को तैयार कर रहा है और दिलों में नफ़रत बोने का सबब बन रहा है। वाट्सएप के सड़ांध मारते कचरे से खुद को बाहर निकालिये, फेसबुक की शेयर बटन को सोच समझकर इस्तेमाल कीजिये, ट्विटर पर असली और नकली के अंतर को पहचानिये। फैक्ट चैकिंग साइटों जैसे Alt न्यूज़ और मीडिया विज़िल वगैरह पर बराबर से नज़र रखा कीजिये ये आपको चीज़ो को समझने और पहचानने में बहोत कारगर साबित हो सकती हैं और ये सब भी नहीं कर सकते तो अपने स्मार्टफोन को तोड़कर गटर में डाल दीजिये या फ़िर नहीं डाल सकते तो कम से कम इस छः इंच के खिलौने को सोशल मीडिया से मुक्त रखिये स्वंय-हित, समाज-हित और देश-हित में ये भी आपका एक बहूमूल्य योगदान होगा।

(लेखक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हैं)
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UPUKLive: कहीं आप फेक न्यूज़ की भट्ठी में नफरतबाज तो नहीं बन रहे हैं?, ऐसे करें पहचान
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