ताजुश्शरिया हुए रुखसत, खानकाहे बरकातिया के सज्जादाओं में ग़म

ताजुश्शरिया हुए रुखसत, खानकाहे बरकातिया के सज्जादाओं में ग़म

मोहम्मद आमिल
जानशीन मुफ्ती-ए-आजम हिंद हजरत अल्लामा अख्तर रजा खां साहब अज़हरी मियाँ के इंतकाल की खबर से मसलके आला हजरत के करोड़ो मुरीदों को गहरा सदमा पहुचा है. वही इस खबर से सभी गमजदा है.

बरेली शरीफ में रविवार को सुबह करीब 10:30 पर नमाज-ए-जनाज़ा अदा की गई. उसके बाद उनको गेस्ट हाउस में सुपुर्दे ख़ाक किया गया. उनके जनाजे में लाखों लोगों ने शिरकत की. बरेली शरीफ के आला हजरत एटा जनपद के कस्बा मारहरा स्थित खानकाहे बरकातिया से मुरीद रहे.

हजरत अल्लामा अख्तर रजा खां साहब अज़हरी मियाँ के इंतकाल की खबर से मारहरा खानकाह में भी ग़म की लहर है. दरगाह खानकाहे बरकातिया के सज्ज़ादानशीन प्रोफेसर सैयद मोहम्मद अमीन कादरी व सैयद नजीब हैदर नूरी ने दुःख व्यक्त किया.

"वारिसे उलूम आला हजरत, कायमें मकाम हुजूर मुफ़्ती-ए-आज़मे हिन्द हजरत अल्लामा अख्तर रजा खां साहब अज़हरी मियाँ विसाल फरमा गए.
अर्श पर धूम मची वो मोमिन सालेह मिला
फर्श पे मातम उठे वो तय्यबो ताहिर गया
अज़हरी मियाँ का विसाल दुनिया-ए-सुन्नियत का अज़ीम नुकसान है जिसकी तलाफी मुमकिन नही. हजरत वाला का खानकाहे बरकातिया मारहरा शरीफ से पांच पुश्त का ताल्लुक था. वालिद माजिद हुजूर अहसनुल उलमा अलैहिर्रमा ने अज़हरी मिया को जुमला सलासिले तरीकत की खिलाफत व इजाजत से नवाज था. मैं दिल की गहराइयों से असजद रजा खाँ साहब उनके अहले बैत, अहले खानदान और जुमला अहबाबे अहले सुन्नत को ताजियत पेश करता हूँ. रब्बे जुलजलाल इनका बदल अता फ़रमाए और उनके दर्जात बुलन्दतर फ़रमाए."
प्रोफेसर सैयद मोहम्मद अमीन (सज्जादानशीन)

"हमारे लिए यह खबर निहायत ही अफ़सोस नाक है कि खानबादा-ए-आला हजरत के चश्मो चिरागमारुफ आलिमे दीनों शेख़-ए-तरीकत हजरत ताजुशशरिया अल्लामा अख्तर रजा खां साहब अजहरी कादरी बरकाती अलैहिर्रमा हमारे दरमियान नही रहे, हजरत ताजुशशरिया की रहलत दुनिया-ए-सुन्नियत का एक अजीम नुक्सान है. वह एक मुत्तसलिब आलिमे शरीयत व अमल पीरे तरीकत थे. जिनके दम से सुन्नियत न सिर्फ हिंदुस्तान बल्कि बेरुने हिंद बेहद मजबूत थी. खानबादा-ए-बरकात, खानबादा-ए-रज़विया के इस गम में शमीम कल्ब से शरीक है. हजरत ताजुशशरिया अलैहिर्रमा मेरे वालिद माजिद के बेहद चहीते खुल्फा में से एक थे और हजरत ताजुशशरिया भी वालिद-ए-माजिद की बारगाह में जिस नियाजमन्दी से पेश आते थे वो यकीनन आला हजरत व हुजूर मुफ़्ती-ए-आज़म हिन्द (रह.) से उन्हें विरासत में मिली थी. अल्लाह तआला जानशीन हुजूर मुफ़्ती-ए-आज़म हिन्द अलैहिर्रमा को अपने जबारे रहमत में ख़ास मक़ाम अता फ़रमाए और उनके वली-ए-अहद और तमाम मुतवससेलीन और मुहब्बीन को सब्र-ए-ज़मील कामिल अता फ़रमाए."
सैयद नजीब हैदर नूरी बरकाती(सज्जादानशीन)

बरेली का है मारहरा से गहरा रिश्ता
बरेली का मारहरा से गहरा रिश्ता है. दुनियाभर में मसलके आला हजरत को मानने वाले करोड़ो मुरीद हैं. आला हजरत बरेली शरीफ से रहे. हुजूर ताजुश्शरिया आला हजरत के परपोतो में से थे. आला हजरत का डंका पूरी दुनिया में बजता है. आला हजरत मारहरा शरीफ स्थित खानकाहे बरकातिया के मशहूर बुजुर्ग सैयद आले रसूल से मुरीद थे. आला हजरत मारहरा शरीफ के बुजुर्गों की बहुत इज्जत किया करते थे. वह जब भी मारहरा शरीफ आते थे तो ट्रेन से उतरने से पहले अपनी चप्पलों को बगल में दबा लिया करते और नंगे पाँव मारहरा शरीफ की धरती पर घूमा करते थे. आज भी आला हजरत के खानदान के लोग मारहरा शरीफ की बहुत इज्जत करते हैं.

दुनियाभर में मशहूर थे हुजूर ताजुश्शरिया
ताजुश्शरिया अजहरी मियां अहले सुन्नत वल जमात की एक बड़ी हस्ती है. भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर मे उनके लाखों की तादाद में मुरीद है. उनकी गिनती विश्वभर के प्रसिद्ध आलिमों में होती रही है. 2011 में वे अमेरिका की जार्ज टाउन यूनिवर्सिटी के इस्लामिक क्रिश्चियन अंडरस्टेंडिंग सेंटर की ओर से किये जाने वाले सर्वे में 28वां स्थान पर आए. इसके अलावा जॉर्डन की रॉयल इस्लामी स्ट्रेजिक स्टडीज़ सेंटर के 2014-15 के सर्वे में उन्हें 22 वें स्थान पर रखा गया. आलमे इस्लाम में अज़हरी मियाँ के करोड़ों मुरीद हैं। सन 1943 में खानदाने आला हज़रत में पैदा हुए थे. कुल 75 साल की उम्र में दुनिया से रुख़सत हुए अज़हरी मियाँ. अज़हरी मियाँ को ताजुश्शरिया के ख़िताब से दुनिया में जाना जाता है. 2 फरवरी 1943 को जन्मे अजहरी मियां बरलेवी आंदोलन के संस्थापक अहमद रजा खान के वंशज हैं. उन्होंने सन 2000 में बरेली में इस्लामिक स्टडीज जमीरूर रजा के नाम से एक इस्लामी धर्मशास्त्र केंद्र की स्थापना की थी. उन्होने विज्ञान, धर्म और दर्शन सहित कई विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला पर कई किताबें लिखी हैं. अज़हरुल फतवा के खिताब से फतवा का संग्रह उनका विशाल कार्य है. उन्होंने कई अनुवाद भी किए. जिनमे अल-हक्कुल मोबेन दिफा कंजूल इमान, टी.वी.विडियो का शराई ऑपरेशन, मिरातुन नजदीयाह, तस्वीरों का शराई हुक्म (फोटोग्राफी), शराह हदीस ए नियत आसार ए कयामत आदि है. 2006 में हुजूर ताजुश्शरिया को काबा शरीफ के गुस्ल के लिए बुलाया गया था.

विदाई की बेला पर हर आँख थी नम
हुजूर ताजुश्शरिया के इंतकाल से सुन्नी जगत में ग़म था, उनकी विदाई बेला पर लाखों अकीदतमंद बरेली शरीफ पहुचे थे, क्या मुसलमान क्या हिन्दू हर इंसान आँखे नम थी, करीब 4 करोड़ इंसानों को अपना मुरीद करके इंसानियत का पैगाम दे चुके हैं. जनाज़े में शामिल हर शख्स ने हुजूर ताजुश्शरिया को आखरी विदाई दी. खास तौर पर अल अजहर यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल अपने स्टूडेंट के आखरी दीदार के लिए आए. एशिया में सिर्फ अजहरी मियां ने ही मिस्र की इस्लामिक यूनिवर्सिटी टॉप की है.

मिस्र के राष्ट्रपति से लेकर राजनैतिक हस्तियों ने पेश की ख़िराजे अक़ीदत
हुजूर ताजुश्शरिया के इंतकाल की खबर से हर ओर गम का माहौल है. हुजूर ताजुश्शरिया को देश ही नही बल्कि विदेशों में भी ख़िराजे अक़ीदत पेश की जा रही है. उनके इंतकाल की खबर से मिस्र के राष्ट्रपति रजब तैयब इरदुगोन ने अपनी अकीदत का नजराना न सिर्फ एक पत्र के जरिये अजहरी मियां के बेटे शहर काजी असजद रजा खां को भेजा है बल्कि एक ऑडियो भी भेजा है जिसमें अपनी आवाज में अजहरी मियां के लिए खिराजे अकीदत पेश की है। उन्होंने इसमें कहा है कि अल्लाह ताजुश्शरीया पर रहमत और दर्जा बुलंद फरमाए। उनके घरवालों और अकीदतमंदों को सब्र अता फरमाए. वही उनके कई मुल्कों द्वारा ख़िराजे अक़ीदत पेश की गयी. इनके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व मंत्री शिवपाल यादव, आजम खान, केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू आदि ने भी खिराजे अकीदत पेश की है।

सियासत से रहे दूर, राजनेताओं से बनाई दूरी
जानशीन मुफ्ती-ए-आजम हिंद हजरत अल्लामा अख्तर रजा खां साहब अज़हरी मिया ने हमेसा सियासत से परहेज किया. उन्होंने कभी भी किसी राजनेता से मुलाक़ात नही की. ताजुश्शरिया ने हमेसा कौम की शिक्षा और भलाई के लिए काम किया. नसबन्दी पर फतवा हो या फिर इमरजेंसी के वक़्त उनका सरकार के विरोध में खड़ा होना वह हक की बात पर कभी पीछे नही हटे. उनके दर से राजनेताओं व फ़िल्मी हस्तियों तक को बगैर मुलाक़ात करे वापस मायूस लौटना पड़ा था. जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पदयात्रा के दौरान बरेली पहुचे तो उन्होंने ताजुश्शरिया से मिलने की इच्छा व्यक्त की लेकिन हुजूर ताजुश्शरिया ने मिलने से इंकार कर दिया था. अमर सिंह जब फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त को लेकर हुजूर ताजुश्शरिया से मुलाक़ात के लिए पहुचे तो उन्हें भी मायूस होना पड़ा. अयोध्या मामले में जब श्री श्री रविशंकर ने हुजूर ताजुश्शरिया से मुलाकात करना चाही तो उन्होंने मिलने से मना कर दिया था. हुजूर ताजुश्शरिया ने देश व विदेशों में अपनी तकरीर में साफ़ कहा करते थे कि मजहबी मामलों से सियासत को दूर रखा जाए.

गंगा-जमुनी तहजीब का दिखा संगम
हुजूर ताजुश्शरिया के जनाजे में शामिल होने के लिए देश के हर राज्य से लेकर दूसरे मुल्कों से लाखों अकीदतमंद बरेली शरीफ पहुचे. इस दौरान शहर में गंगा-जमुनी तहजीब का संगम दिखाई दिया. शहर के हिन्दू समुदाय के लोगों ने हुजूर ताजुश्शरिया के अंतिम दीदार को आए लाखों अकीदतमंदों की दिल खोलकर मदद की. समाज के लोगों ने जगह-जगह पीने के पानी के लिए प्याऊ के इंतजाम किए. बारिस से बचाने के लिए छातों का इंतजाम किया गया तो वही भीषण गर्मी से निजात दिलाने के लिए कूलर पंखों तक का इंतजाम उनके द्वारा किया गया. हिन्दू समाज द्वारा किए गए इस कार्य की सोशल मीडिया पर काफी प्रशंसा की जा रही है.
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