रज़ा लाइब्रेरी उत्तर प्रदेश की ही नही, बल्कि पूरे हिन्दुस्तान की शानः राज्यपाल

रज़ा लाइब्रेरी उत्तर प्रदेश की ही नही, बल्कि पूरे हिन्दुस्तान की शानः राज्यपाल

अज़हर उमरी
लखनऊ।  रामपुर रज़ा लाइब्रेरी दुलर्भ एवं प्राचीन पाण्डुलिपियों के कारण केवल भारत ही नहीं, वरन् सम्पूर्ण विश्व में विख्यात है। यहाँ अरबी, फ़ारसी, उर्दू, तुर्की, पश्तो तथा संस्कृत इत्यादि भाषाओं की लगभग 17,000 पाण्डुलिपियाँ, 5000 लघु चित्र, 3000 इस्लामिक कैलीग्राफी के नमूने तथा 60,000 मुद्रित पुस्तकें हैं। 

इस अनमोल शैक्षिक विरासत को संजोने में महत्वपूर्ण योगदान प्रथम नवाब, नवाब फैज़्ाुल्लाह ख़ाँ और नवाब रज़ा अली ख़ाँ का रहा। दोनों नवाबों के कार्य और उनके कारनामों को स्मरण करने के लिए रामपुर रज़ा लाइब्रेरी बोर्ड ने 1995 में दोनों के नाम से अरबी, फ़ारसी, इतिहास, कला एवं संस्कृत की श्रेणी में नवाब फैज़्ाुल्लाह ख़ाँ और नवाब रज़ा अली ख़ाँ पुरस्कार प्रदान करने का निर्णय लिया था। लाइब्रेरी की ओर से 1998, 2010, 2014 में यह पुरस्कार प्रदान किये जा चुके हैं।

इसी क्रम को बनाये रखते हुए रामपुर रज़ा लाइब्रेरी ओर से कल 19 दिसम्बर की संध्या में गांधी सभागार हाॅल, राजभवन, लखनऊ में नवाब फैज़्ाुल्लाह ख़ां, नवाब रज़ा अली ख़ां एवं मुंशी नवल किशोर पुरस्कार, पुरस्कार वितरण समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर श्री राम नाईक, माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश/अध्यक्ष, रामपुर रज़ा लाइब्रेरी बोर्ड के करकमलों द्वारा चयनित विद्वानों को वर्ष 2014-15 के लिए प्रो0 नबी हादी, अलीगढ़ को नवाब फैज़्ाुल्लाह ख़ां पुरस्कार फ़ारसी भाषा की श्रेणी में, वर्ष 2014-15 के लिए प्रो0 मोहम्मद सालिम क़िदवई को नवाब रज़ा अली ख़ां पुरस्कार इस्लामिक अध्ययन की श्रेणी में, वर्ष 2015-16 के लिए प्रो0 मोहम्मद सलाउद्दीन उमरी, अलीगढ़ को नवाब फैज़्ाुल्लाह ख़ां पुरस्कार अरबी भाषा और साहित्य की श्रेणी में एवं वर्ष 2015-16 के लिए इस्लामिक बुक फाउन्डेशन, नई दिल्ली को मुंशी नवल किशोर पुरस्कार उर्दू प्रकाशन की श्रेणी में पुरस्कार प्रदान किये गये। 
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ श्री राम नाईक, माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश/अध्यक्ष, रामपुर रज़ा लाइब्रेरी बोर्ड के करकमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर श्री पंकज राग, संयुक्त सचिव, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने श्री राम नाईक, माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश का फूलों का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया एवं रज़ा लाइब्रेरी की निदेशक सुश्री दीपिका पोखरना द्वारा स्वागत भाषण, डाॅ0 अबूसाद इस्लाही, लाइब्रेरी एवं सूचना अधिकारी, रज़ा लाइब्रेरी द्वारा पुरस्कार विजेताओं का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के समन्वयक श्री अरूण कुमार सक्सेना, वरिष्ठ तकनीकी रेस्टोरर ने किया और अन्त में सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर, श्री राम नाईक, माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश/अध्यक्ष, रामपुर रज़ा लाइब्रेरी बोर्ड ने कहा कि कि रज़ा लाइब्रेरी उत्तर प्रदेश की ही नही, बल्कि पूरे हिन्दुस्तान की शान है। मुझे बड़ी प्रशंसा है कि आज जो पुरस्कार वितरण का समारोह राजभवन में सम्पन्न हो सका है। राजभवन में जिनका सम्मान किया गया है उन्होंने अपने जीवन में साहित्य व शिक्षा की कैसी सेवा की यह जानकारी आपके समक्ष है। कहा कि आज के पुरस्कार वितरण समारोह में जो पुरस्कार दिया गया मैं आप सबकी ओर और राज्यपाल के नाते उनका अभिनन्दन करता हूँ और उनके हाथों साहित्य की निस्वार्थ सेवा और प्रगति हुई है और उनके हाथों साहित्य का भण्डार बढ़ता रहे, मैं ऐसी आशा करता हूँ। जोकि 17वीं शताब्दी में एक कुतुबखाना के रुप में थी। कहा कि देश आज़ादी के बाद सरकार बदलती रही, शासन बदलते रहे, लेकिन लाइब्रेरी का संचालन होता रहा। मुझे विश्वास है आने वाले दिनों में रज़ा लाइब्रेरी की और उन्नति व समृद्धि देखेंगे। रज़ा लाइब्रेरी की जानकारी और लोगों को हो, जो विद्वान, शिक्षा व साहित्य के जीवन से सम्बन्धित हैं तथा सभी को लाइब्रेरी को आगे ले जाना चाहिए। कहा कि देश की सीमा होती है लेकिन भाषा की सीमा देश के बाहर तक जाती है यह संस्कृति के वाहक हैं। इस अवसर पर माननीय श्री राज्यपाल महोदय द्वारा रज़ा लाइब्रेरी और संस्कृति मंत्रालय में पांचों भाषाओं में अपनी पुस्तक भेंट की गयी।
इस अवसर पर रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की निदेशक सुश्री दीपिका पोखरना ने अपना स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस मुबारक मौके पर सबका स्वागत करती हूँ। कुतुबख़ाना एक उच्च नाम रखता है जो गलत नहीं। कहा कि नवाबों को भारत और भारतीय संस्कृति से अति प्रेम था तथा उनकी अभूतपूर्व कोशिशों के बावजूद ही लाइब्रेरी में दुलर्भ एवं अमूल्य संग्रह की समृद्धि हुई है। रामपुर रज़ा लाइब्रेरी संसार की सर्वोत्तम लाइब्रेरियों में से एक है। आज हमें गर्व हैं 14वीं से 15वीं शताब्दी तक पाण्डुलिपियां अरबी, फारसी, संस्कृत, उर्दू, तुर्की, पश्तों लाइब्रेरी में संग्रहित हैं। कहा कि बहुत कम ही लाइब्रेरियाँ ऐसी नायाब और अद्भुत होंगी और यह वह रियासत है जो 1947 में भारतीय संघ में सबसे पहले शामिल हुई। कहा कि लाइब्रेरी में दुलर्भ पाण्डुलिपियां, इस्लामिक कैलीग्राफी के नमूने, ताड़पत्र, ऐतिहासिक दस्तावेज़, प्राचीन मुद्रित पुस्तकें, इण्डो-पर्शियन और इण्डो-सेन्ट्रल एशियन लघु चित्रो तथा ऐतिहासिक सिक्के, शीशे की प्राचीन कलाकृतियां आदि संग्रह में संग्रहित हैं। कहा कि पुस्तकालय के संग्रह में अरबी, फ़ारसी, संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, तुर्की, पश्तों एवं अग्रेंजी आदि भाषाओं एवं लिपियों को संजोकर सुरक्षित रखा गया है जो सामान्य जन एवं बुद्धिजीवी वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करती है। श्री राम नाईक, माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश/अध्यक्ष, रामपुर रज़ा लाइब्रेरी बोर्ड एवं श्री पंकज राग, संयुक्त सचिव, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने व्यस्तम कार्यक्रमों से समय निकाल कर इस पुरस्कार वितरण को सफल बनाने में अपना आर्शीवाद और मार्गदर्शन प्रदान किया। 
इस अवसर पर डाॅ0 अबूसाद इस्लाही, लाइब्रेरी एवं सूचना अधिकारी, रज़ा लाइब्रेरी ने पुरस्कार विजेताओं का संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा कि प्रो0 नबी हादी का नाम फ़ारसी के महत्वपूर्ण शिक्षकों एवं विद्वानों में है। प्रो0 हादी साहब का जन्म उत्तर प्रदेश के ज़िला अम्बेडकर नगर के प्रसिद्ध कस्बा झोलस में हुआ था। आप उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए अलीगढ़ गये और 1949 में बी0एस0सी0, 1952 में एल0एल0बी0 की। इसके बाद फ़ारसी में एम0ए0 और पी0एच0डी की डिग्रियां प्राप्त की। प्रो0 हादी साहब 1963 ई0 में तेहरान विश्वविद्यालय से डी0लिट की डिग्री0 प्राप्त की और एक शिक्षक के रुप में फ़ारसी विभाग में नियुक्ति हुई और फ़ारसी विभागाध्यक्ष तथा डीन आर्ट फेकल्टी का के पद पर भी कार्य किया। फ़ारसी भाषा व साहित्य की सेवाओं के लिए भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रपति एवार्ड प्रदान से भी सम्मानित किया गया। अक्टूबर 1991 ई0 में सेवानिवृत हुए और 8 जनवरी 2015 को प्रो0 हादी साहब का निधन हो गया। एक अन्य पुरस्कार विजेता प्रो0 मोहम्मद सालिम क़िदवई बारे में बताते हुए कहा कि प्रो0 मोहम्मद सालिम क़िदवई प्रसिद्ध विद्वान, पत्रकार व महान साहित्यिकार एवं लेखक मौलाना अब्दुस सलाम क़िदवई नदवी के पुत्र हैं। आपका जन्म 15 नवम्बर 1938 ई0 को लखनऊ में हुआ और प्रारम्भिक शिक्षा अपने पिता से प्राप्त करने के बाद दारूल उलूम नदवातुल उलेमा लखनऊ से आलिम की डिग्री प्राप्त की और जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हाई स्कूल, इण्टरमीडिएट एवं बी0ए0 की शिक्षा ग्रहण कर डिग्रियाँ प्राप्त कीं। आपने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एम0ए0 और पी0एच0डी0 की उच्च डिग्रियाँ भी प्राप्त की है। 1964 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इस्लामिक अध्ययन से सम्बन्धित हुए और बाद में प्रोफे़सर तथा विभागाध्यक्ष पद पर कार्य किया। इसके अतिरिक्त निदेशक इन्स्टीट्यूट  आॅफ इस्लामिक स्टेडीज के पद भी सेवा की है। 2000 ई0 में आप सेवानिवृत हुए। आपकी शैक्षिक एवं साहित्यिक सेवाओं के लिए भारत के राष्ट्रपति ने 2004 में (सार्टिफिकेट आॅफ आॅनर) से सम्मानित किया है। साथ ही प्रो0 मोहम्मद सलाउद्दीन उमरी का संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा है आपका जन्म जिला हरदोई के प्रसिद्ध कस्बे गोपामऊ में हुआ और वही पले बढ़े। अपने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से अरबी भाषा व साहित्य में पी0एच0डी0 की और 1986 में अरबी विभाग में लेक्चरर हो गये। इस समय प्रो0 साहब प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। प्रो0 उमरी साहब को अरबी, फ़ारसी, अंग्रेजी तथा हिन्दी भाषाओं पर महारत प्राप्त है। कहा कि शैक्षिक सेवाओं के अतिरिक्त प्रो0 उमरी अरबी विभाग के दो बार अध्यक्ष बने। सर सैयद एकेडमी के मानद निदेशक के रुप में सेवाएं प्रदान कीं। वर्तमान में वह देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों की शैक्षिक विभागों एवं विभिन्न शिक्षा केन्द्रों के सदस्य हैं। इस्लामिक बुक फ़ाउन्डेशन, नई दिल्ली का परिचय देते हुए कहा कि उर्दू पुस्तकों के प्रकाशन का एक महत्वपूर्ण तथा प्रसिद्ध केन्द्र है। इस केन्द्र के प्रोपराइटर श्री फिरासत अली ख़ा का जन्म रामपुर में हुआ। 1959 में उन्होंने दिल्ली के एक प्रकाशन केन्द्र में लेखाकार की सेवा आरम्भ की। इसके बाद केन्द्र के उत्पादन प्रभारी नियुक्त हुए। 1989 में आपने अपना प्रकाशन केन्द्र इस्लामिक बुक फ़ाउन्डेशन स्थापित किया। अब तक इस केन्द्र से इतिहास, साहित्य, सूफीवाद, इस्लामियात एवं बच्चों के साहित्य पर देश तथा विदेश के प्रसिद्ध शोधकर्ताओ एवं लेखकों की अनेकों पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।
इस अवसर पर प्रो0 मोहम्मद मुशाहिद हुसैन, कुलपति, एम0जे0पी0 रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली, प्रो0 इक़्ितदार मोहम्मद ख़ां, प्रो0 सै0 इराक रज़ा जै़दी, श्री जगदीश पीयूष, श्री खालिद अनवर, श्री अब्दुल अली, श्री फ़याज़़, श्रीमती बिल्क़ीस फ़ारूकी, श्री तारिक़ अज़हर, श्री हिमांशु सिंह, मिस मोहिनी रानी, श्री इस्बाह ख़ां, श्री मुख्तार अली, श्री कमाल खां, श्री राजेश कुमार इत्यादि एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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