नोटबंदीः पीएम मोदी के सपोर्टर ही करेंगे खुलकर विरोध, बिजनेस में आई 60 फीसदी गिरावट

नोटबंदीः पीएम के सपोर्टर ही करेंगे खुलकर विरोध, बिजनेस में आई 60 फीसदी गिरावट

सुहैल उमरी
आगरा। आज चैम्बर भवन में पूर्व अध्यक्ष एवं ट्रेड डेवलपमेन्ट प्रकोष्ठ के चेयरमैन मनीश अग्रवाल की अध्यक्षता में नोट बन्दी से व्यापार पर पड़े प्रभाव के सन्दर्भ में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें आगरा के विभिन्न व्यापारिक संगठनों द्वारा भाग लिया गया। 

बैठक में मत आया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश में काले धन को समाप्त करने व आतंकवाद को खत्म करने के लिये नोट बन्दी की घोषणा की गई थी जो एक सराहनीय कदम था। जिसका सभी स्वागत किया था। नोट बन्दी के बाद में इसका असर आम जीवन मेे पड़ने लगा। 

व्यापार में भी इसका असर दिखने लगा। इसी के सम्बन्ध में लोगो ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये। नोट बन्दी के आदेष के बाद में व्यापार पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। 50 से 60 प्रतिषत व्यापार में गिरावट आयी है। कई व्यापार तो बन्द होने के कगार पर पहुंच गए है। मजदूर निकाले जा रहे है। हम व्यापारी साहलगों पर ही निर्भर है। 
साहलगों के समय में बाजार रात्रि के 11:00 बजे तक खुले रहते थे। वही बाजार आज नोट बन्दी के कारण 7:00 बजे ही बन्द हो जाते है। उद्योग व्यापार मण्डल मोतीगंज के अध्यक्ष रमन गोयल जी ने बताया कि इस निर्णय से केवल व्यापारी वर्ग को टारगेट बनाया गया हैं। 

कालाधन तो अधिकारियों व राजनेताओं के पास था। उनके यहां कोई सर्वे ही किया गया। माननीय प्रधान मंत्री महोदय का फकीर के नाम पर गलत बयान बाजी कर रहे है। जो देष के सर्वोच्च पद की गरिमा के प्रतिकूल है। 50 हजार व्यापार कैसे चल सकता है। यह कोई साजिष है। आगरा व्यापार मण्डल के अध्यक्ष श्री टी.एन. अग्रवाल जी ने बताया कि प्रधानमंत्री महोदय ने निर्णय सही लिया लेकिन इम्प्लीमेन्टेषन  सही नही हुआ। उद्यमी और व्यापारी को प्रधानमंत्री महोदय ने चोर समझा। दो चार लाख रूपये कोई काला धन नही होता बल्कि टैक्स फ्री था किन्तु वह चलन में था। अचल नही था इसलिये उससे व्यापार में वृद्धि हो रही थी। जो विभिन्न स्तरों पर कर का भुगतान कर रहा है। मै व्यापारी पहले हूॅ पार्टी बाद में। चैम्बर के पूर्व अध्यक्ष सोहन लाल जैन ने कहा कि नोट बन्दी के आदेष रोकड़ बैंक में जमा हो गई है। निकासी नही हो पा रही है। इससे हमारे व्यापार में 60 प्रतिषत गिरावट आई है। यह जल्दबाजी में निर्णय लिया गया है। इसे वापिस लेना चाहिए। प्रधानमंत्री देष का रक्षक होता है। विश्णु भगवान जी ने कहा कि प्रधानमंत्री महोदय की कथनी और करनी में फर्क है। बड़ी मिठी बात करते है। इससे न तो भ्रश्टाचार खत्म और न आतंकवाद पर अंकुष। वे कहते है कि 1947 तक के खाते खुलाबा दुंगा। ऐसा प्रतित होता है कि कानून का ज्ञान नही है क्योकि 8 वर्श से पूर्व के खाते आयकर अधिनियम के अनुसार खोले नही जाते व्यापरी नेता अतुल बंसल जी ने कहा कि नोट बन्दी का कदम स्वागत योग्य था किन्तु उसके बाद में जो कुछ गठित हो रहा है। वह सही नही हैं। करोड़ो व अरबो में काला धन नयी करेन्सी में पकड़ा जा रहा है। उसके लिये कौन जिम्मेदार हैं। क्या उसके लिए व्यापारी वर्ग जिम्मेदार है या बैंकिंग सिस्टम। पूर्व अध्यक्ष श्री सीताराम अग्रवाल ने कहा कि इस निर्णय से जाली नोटो पर अंकुष लगा है व आतंकवाद पर नियन्त्रण हुआ किन्तु प्रक्रिया के कारण व्यापारी/मध्यम वर्ग त्रस्त हुआ है। श्री सलभ षर्मा जी  बताया कि यह फैसला सही नही था। आवेग में लिया गया फैसला था। सफलता नही मिली तो बड़ी हुसयारी से कैषलैष डिजिटल पेमेन्ट की ओर सिफ्ट कर गए जिसका नोट बन्दी से कोई सम्बन्ध नही है। यह तो बिना नोट बन्दी के भी किया जा सकता था। चैम्बर उपाध्यक्ष राजेष अग्रवाल जी का कहना था कि नोट बन्दी से पहले कैषलैष और डिजिटल प्रणाली को अपनाना चाहिए था। इस हेतु सुविधाऐं जैसै विधुत, नेटवर्किंग/इन्टरनेट सिस्टम आदि मुहिया कराना आवष्यक है जो आज भी पिछड़े क्षेत्रों में उपलब्ध नही हैं आज भी भारत में 50 प्रतिषत जनता बिना बैंक एकाउन्ट के है। इसलिए यह सिस्टम कितना सफल हो सकेगा कहा नही जा सकता। नोट बन्दी का सबसे बड़ा प्रभाव है मीन्स आॅफ ट्रान्सपोर्ट जो व्यापार का रीड़ है। 

समस्त चर्चा के उपरान्त यह निर्णय लिए गए कि उत्तर प्रदेष में विषेश आगरा में अन्य प्रान्तों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेष की अपेक्षा कम कैष उपलब्ध हुआ है। अतः प्रधानमंत्री महोदय को इस सम्बन्ध में अवगत कराया गया। सभी उनके टुवीटर पर ट्वीट करें। व्यापारियों को कैष उपलब्ध नही हो पा रहा है जबकि नई करेंसी जमा खोरो के पास पकड़ी जा रही हैं। इसमें बैंकों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतित होती है। आगरा में जूते का व्यापार अधिक है। अतः कारीगरों को भुगतान की आवष्कता पड़ती है। 10 लाख तक के व्यापारी के यहां छापे नही पड़ने चाहिए। यदि उन्हे नोटिस प्राप्त होता है तो छापे से पहले उस अधिकारी की भी जांच होनी चाहिए। उद्यमियों व व्यापारियों के लिए बैंको में प्रथक व्यवस्था की जाए जिससे उन्हे लम्बी कतार में न खड़ा होना पडे़।

बैठक में चैम्बर उपाध्यक्ष द्वय गिरीष चन्द गोयल, राजेष अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष सीता राम अग्रवाल, सोहन लाल जैन, पूर्व अध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी व ट्रेड डवलपमेंन्ट के चेयरमैन मनीश अग्रवाल, विश्णु भगवान अग्रवाल, टी.एन. अग्रवाल, रमन गोयल, मनोज कुमार गुप्ता, एसएन अग्रवाल, संजय गोयल, अतुल कुमार बंसल, संजय गर्ग, उदय अग्रवाल, सलभ षर्मा, सुरेन्द्र नाथ गुप्ता, अमित वाश्र्णेय आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। 

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