अशफाक उल्ला खां हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर थे

अशफाक उल्ला खां हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर थे

न कोई इंग्लिश है न कोई जर्मन,
न कोई रशियन है न कोई तुर्की।
मिटाने वाले हैं अपने हिंदी,
जो आज हमको मिटा रहे हैं।।

आजादी के 69 साल बाद भी यह पंक्तियां सटीक बैठती है. यें पक्तियां लिखी थी भारतीय स्वतंत्रता सेनानी अशफाक उल्ला खां ने. अशफाक उल्ला खां को भारत के प्रसिद्ध अमर शहीद क्रांतिकारियों में गिना जाता है. देश की आज़ादी के लिए हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर करने वाले अशफाक उल्ला खां हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर थे. ''काकोरी कांड'' के सिलसिले में 19 दिसम्बर, 1927 ई. को उन्हें फैजाबाद जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया. अशफाक उल्ला खां ऐसे पहले मुस्लिम थे, जिन्हें षड्यंत्र के मामले में फांसी की सज़ा हुई थी. उनका हृदय बड़ा विशाल और विचार बड़े उदार थे. हिन्दू-मुस्लिम एकता से सम्बन्धित संकीर्णता भरे भाव उनके हृदय में कभी नहीं आ पाये. सब के साथ सम व्यवहार करना उनका सहज स्वभाव था. कठोर परिश्रम, लगन, दृढ़ता, प्रसन्नता, ये उनके स्वभाव के विशेष गुण थे.

अशफाक उल्ला खां का जन्म 22 अक्टूबर 1900 को उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर ज़िले के ''शहीदगढ़'' नामक स्थान पर हुआ था. इनके पिता का नाम मोहम्मद शफीक उल्ला खां था, जो एक पठान परिवार से ताल्लुक रखते थे तथा माता मजहूरुन्निशां बेगम थीं. इनकी माता बहुत सुन्दर थीं और खूबसूरत स्त्रियों में गिनी जाती थीं. इनका परिवार काफ़ी समृद्ध था. परिवार के सभी लोग सरकारी नौकरी में थे. किंतु अशफाक को विदेशी दासता विद्यार्थी जीवन से ही खलती थी. वे देश के लिए कुछ करने को बेताव थे. बंगाल के क्रांतिकारियों का उनके जीवन पर बहुत प्रभाव था.

कविता का शौक
अशफाक कविता आदि भी किया करते थे. उन्हें इसका बहुत शौक था. उन्होंने बहुत अच्छी-अच्छी कवितायें लिखी थीं, जो स्वदेशानुराग से सराबोर थीं. कविता में वे अपना उपनाम हसरत लिखते थे. उन्होंने कभी भी अपनी कविताओं को प्रकाशित कराने की चेष्टा नहीं की. उनका कहना था कि "हमें नाम पैदा करना तो है नहीं. अगर नाम पैदा करना होता तो क्रान्तिकारी काम छोड़ लीडरी न करता?" उनकी लिखी हुई कविताएं अदालत आते-जाते समय अक्सर ''काकोरी कांड'' के क्रांतिकारी गाया करते थे.

रामप्रसाद बिस्मिल से मित्रता
देश में चल रहे आन्दोलनों और क्रांतिकारी गतिविधियों से अशफाक उल्ला खां प्रभावित होने लगे थे. धीरे-धीरे उनमें क्रान्तिकारी भाव पैदा होने लगे. उनको बड़ी उत्सुकता हुई कि किसी ऐसे आदमी से भेंट हो जाये, जो क्रान्तिकारी दल का सदस्य हो. उस समय ''मैनपुरी षड़यन्त्र'' का मामला चल रहा था. अशफाक शाहजहांपुर में ही स्कूल में शिक्षा पाते थे. ''मैनपुरी षड़यन्त्र'' में शाहजहांपुर के ही रहने वाले एक नवयुवक के नाम भी वारण्ट निकला था. वह नवयुवक और कोई नहीं, रामप्रसाद बिस्मिल थे. यह जानकर अशफाक को बड़ी प्रसन्नता हुई कि उनके शहर में ही एक आदमी है, जैसा कि वे चाहते थे. किन्तु मामले से बचने के लिये रामप्रसाद बिस्मिल फ़रार थे. जब शाही ऐलान द्वारा सब राजनीतिक कैदी छोड़ दिये गये, तब रामप्रसाद बिस्मिल भी शाहजहांपुर आ गये. जब अशफाक को यह बात मालूम हुई तो उन्होंने बिस्मिल से मिलने की कोशिश की. उनसे मिलकर षड्यंत्र के सम्बन्ध में बातचीत करनी चाही. पहले तो रामप्रसाद बिस्मिल ने टालमटूल कर दी. परन्तु फिर अशफाक के व्यवहार और बर्ताव से वह इतने प्रसन्न हुए कि उनको अपना बहुत ही घनिष्ट मित्र बना लिया. इस प्रकार वे क्रान्तिकारी जीवन में आ गये. क्रान्तिकारी जीवन में पदार्पण करने के बाद से अशफाक उल्ला खां सदा प्रयत्न करते रहे कि उनकी भांति और भी थे मुस्लिम नवयुवक क्रान्तिकारी दल के सदस्य बनें. हिन्दु-मुस्लिम एकता के वे बहुत बड़े समर्थक थे.

काकोरी काण्ड
महात्मा गांधी का प्रभाव अशफाक उल्ला खां के जीवन पर प्रारम्भ से ही था, लेकिन जब ''चौरी चौरा घटना'' के बाद गांधीजी ने ''असहयोग आंदोलन'' वापस ले लिया तो उनके मन को अत्यंत पीड़ा पहुंची. रामप्रसाद बिस्मिल और चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 8 अगस्त, 1925 को शाहजहाँपुर में क्रांतिकारियों की एक अहम बैठक हुई, जिसमें हथियारों के लिए ट्रेन में ले जाए जाने वाले सरकारी ख़जाने को लूटने की योजना बनाई गई. क्रांतिकारी जिस धन को लूटना चाहते थे, दरअसल वह धन अंग्रेज़ों ने भारतीयों से ही हड़पा था. 9 अगस्त, 1925 को अशफाक उल्ला खां, रामप्रसाद बिस्मिल, चन्द्रशेखर आज़ाद, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह, सचिन्द्र बख्शी, केशव चक्रवर्ती, बनवारी लाल, मुकुन्द लाल और मन्मथ लाल गुप्त ने अपनी योजना को अंजाम देते हुए लखनऊ के नजदीक ''काकोरी''में ट्रेन द्वारा ले जाए जा रहे सरकारी ख़ज़ाने को लूट लिया. ''भारतीय इतिहास'' में यह घटना "काकोरी कांड" के नाम से जानी जाती है. इस घटना को आज़ादी के इन मतवालों ने अपने नाम बदलकर अंजाम दिया था. अशफाक उल्ला खां ने अपना नाम ''कुमारजी'' रखा. इस घटना के बाद ब्रिटिश हुकूमत पागल हो उठी और उसने बहुत से निर्दोषों को पकड़कर जेलों में ठूंस दिया. अपनों की दगाबाजी से इस घटना में शामिल एक-एक कर सभी क्रांतिकारी पकड़े गए, लेकिन चन्द्रशेखर आज़ाद और अशफाक उल्ला खां पुलिस के हाथ नहीं आए.

गिरफ्तारी
इस घटना के बाद अशफाक उल्ला खां शाहजहांपुर छोड़कर बनारस आ गए और वहां दस महीने तक एक इंजीनियरिंग कंपनी में काम किया. इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग के लिए विदेश जाने की योजना बनाई ताकि वहां से कमाए गए पैसों से अपने क्रांतिकारी साथियों की मदद करते रहें. विदेश जाने के लिए वह दिल्ली में अपने एक पठान मित्र के संपर्क में आए, लेकिन उनका वह दोस्त विश्वासघाती निकला. उसने इनाम के लालच में अंग्रेज़ पुलिस को सूचना दे दी और इस तरह अशफाक उल्ला खां पकड़ लिए गए.

जेल में अशफाक को कई तरह की यातनाएं दी गईं. जब उन पर इन यातनाओं का कोई असर नहीं हुआ तो अंग्रेज़ों ने तरह−तरह की चालें चलकर उन्हें सरकारी गवाह बनाने की कोशिश की, लेकिन अंग्रेज़ अपने इरादों में किसी भी तरह कामयाब नहीं हो पाए. अंग्रेज अधिकारियों ने उनसे यह तक कहा कि हिन्दुस्तान आज़ाद हो भी गया तो भी उस पर मुस्लिमों का नहीं हिन्दुओं का राज होगा और मुस्लिमों को कुछ नहीं मिलेगा. इसके जवाब में अशफाक उल्ला खां ने अंग्रेज़ अफ़सर से कहा कि- "फूट डालकर शासन करने की चाल का उन पर कोई असर नहीं होगा और हिन्दुस्तान आज़ाद होकर रहेगा". उन्होंने अंग्रेज़ अधिकारी से कहा- "तुम लोग हिन्दू-मुस्लिमों में फूट डालकर आज़ादी की लड़ाई को अब बिलकुल नहीं दबा सकते. अपने दोस्तों के ख़िलाफ़ मैं सरकारी गवाह कभी नहीं बनूँगा.

19 दिसम्बर, 1927 को अशफाक उल्ला खां को फैजाबाद जेल में फांसी दे दी गई. इस तरह भारत का यह महान सपूत देश के लिए अपना बलिदान दे गया. उनकी इस शहादत ने देश की आज़ादी की लड़ाई में हिन्दू-मुस्लिम एकता को और भी अधिक मजबूत कर दिया. आज भी उनका दिया गया बलिदान देशवासियों को एकता के सूत्र में पिरोने का काम करता है.
साभार : दलित दस्तक 
Name

Agra Ajab Gajab Aligarh Amroha Article Ayodhya Bareilly Bijnor Bulandshaher Business Crime Dehradun Desh Videsh Earthquake Education Eid English News Entertainment Etah Exam Result Exclusive Faizabad Gadgets Ghaziabad Gorakhpur Haldwani Haridwar Independence Day International Itawa Jaspur Jaunpur Job Alert Kanpur Kanth Kasganj Kashipur Kaushambi Koshambi Lifestyle Lucknow Maharajganj Mathura Media Meerut Moradabad Moradabad City Nainital New Delhi Noida Notice Panchayat Chunav Photo Live Pilibhit Politics Ramadan Rampur Religious Sambhal Shayri Slider Sports Thakurdwara UPElection2017 US Nagar Uttar Pradesh Uttrakhand Yuva
false
ltr
item
UP UK Live: अशफाक उल्ला खां हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर थे
अशफाक उल्ला खां हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर थे
अशफाक उल्ला खां हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर थे
https://1.bp.blogspot.com/-6vtKvf-OVss/WAs_vKev8AI/AAAAAAAA3Qw/aziyHCfvZpg2Mqy68IO-KPIqvPJurd8nACK4B/s640/0%2Bcopy.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-6vtKvf-OVss/WAs_vKev8AI/AAAAAAAA3Qw/aziyHCfvZpg2Mqy68IO-KPIqvPJurd8nACK4B/s72-c/0%2Bcopy.jpg
UP UK Live
http://www.upuklive.com/2016/10/ashfaqullah-khan-birthday.html
http://www.upuklive.com/
http://www.upuklive.com/
http://www.upuklive.com/2016/10/ashfaqullah-khan-birthday.html
true
4409257454490627827
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy