विधानसभा चुनाव से पहले सपा के अंतर्कलह से यूपी में सियासी उबाल

विधानसभा चुनाव से पहले सपा के अंतर्कलह से यूपी में सियासी उबाल

लखनऊ। सपा की पारिवारिक लड़ाई सड़क पर आने से सियासी हल्कों में उबाल आ गया है। इस बात के कयास लगाये जा रहे हैं कि आखिर वह कौन सी वजह है जिसकी वजह से मंत्री शिवपाल सिंह यादव के बोल अपनी ही सरकार के खिलाफ तीखे हो गये हैं। इससे भी दिलचस्प यह कि शिवपाल के सुर में सुर मिलाकर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर पार्टी के अंदरखाने क्या चल रहा है।

सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के अनुज और पार्टी के प्रदेश प्रभारी शिवपाल सिंह यादव ने अवैध शराब का कारोबार और सपाइयों द्वारा जमीन कब्जा न रुकने पर इस्तीफे की धमकी दी है। रविवार को मैनपुरी और फिर सोमवार को इटावा में शिवपाल के बयान के बाद ही स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुलायम ने दो टूक कहा कि 'शिवपाल के साथ षडयंत्र हो रहा है, वह अलग हो गए तो सरकार असहज हो जाएगी। अगर मैं खड़ा हो गया तब सारे चापलूस भाग जाएंगे और सरकार की ऐसी-तैसी हो जाएगी।

मुलायम पहले भी सरकार के खिलाफ बोलते रहे लेकिन उनके इस बयान ने लोगों को हतप्रभ कर दिया। उन्होंने तो साफ तौर पर कहा कि पार्टी के लोग शिवपाल का अपमान कर रहे हैं। शिवपाल की यह टीस भी जगजाहिर हो गयी जब उन्होंने कहा कि अधिकारी हमारी नहीं सुन रहे हैं। जाहिरा तौर पर सपा में सब कुछ ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सोमवार को मुलायम सिंह यादव से मिलने भी गये थे। मुख्यमंत्री के मिलने के बाद मुलायम का कोई बयान नहीं आया है लेकिन यह सवाल उठने लगा है कि आखिर ऐसा बार-बार क्यों हो रहा है।

विपक्ष को मौका नहीं देना चाहते
मुलायम सिंह ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर छठवीं-सातवीं बार हमला बोला है। जानकार कहते हैं कि वह खुद ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर विपक्ष को मौका नहीं देना चाहते हैं। अब शिवपाल को वह साथ जोड़कर इसे और पुख्ता करने में लगे हैं। इधर भाजपा ने भी अवैध शराब व जमीन कब्जे को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। मुलायम और शिवपाल दांव-पेंच के तहत कहीं भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के हमले को कमजोर तो नहीं करना चाहते हैं। हालांकि मुलायम के इस तरह के बयानों पर अब सवाल भी उठने लगे हैं।

सोशल मीडिया से लेकर अन्य मंचों पर यह बात पूछी जा रही है कि दागी मंत्रियों को मुलायम खुद क्यों संरक्षण देते हैं? और अगर मंत्रियों का कार्य-व्यवहार ठीक नहीं है तो उनके नाम सार्वजनिक कर उन्हें हटाते क्यों नहीं हैं? बात तो यह भी उठने लगी है कि इस तरह के आरोपों से ये लोग अखिलेश को ही कमजोर कर रहे हैं और फिर अगर अधिकारी नहीं सुनते हैं तो उन्हें तैनात क्यों करते है? कहा तो यह भी जा रहा है कि शीर्ष स्तर पर अफसरों की तैनाती को लेकर पारिवारिक मतभेद भी खुलकर सामने आ गया है।


सूत्रों का कहना है कि शिवपाल जिन लोगों की ओर इशारा कर रहे थे, उनमें से तीन विधान परिषद सदस्य हैं, इनमें से एक पर गाजियाबाद और दो पर इटावा-मैनपुरी में जमीन कब्जाने के आरोप लग रहे हैं। तीनों सपाइयों को सपा के ही एक राष्ट्रीय महासचिव का वरदहस्त होना बताया जा रहा है।


मुलायम का कहना था कि पार्टी हमारे और अखिलेश यादव के हाथ में हैं, हमारे जमाने में अधिकारी कार्यकर्ताओं से कहते थे 'मुलायम सिंह से मेरी तारीफ कर देना, अब यह प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्ष तक को सबके सामने भगा देते हैं। जबकि अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। पार्टी के अंदर मेहनत करने वालों का सम्मान नहीं रह गया है। चापलूसी से खुश होने की परंपरा के चलते अधिकारियों के हौसले बढ़े हैं।

सपा के उप्र में सिमटने पर बरसे
मुलायम ने कहा कि मुख्यमंत्री जी, सावधान रहिए। हमारे समय में सपा को चार राज्यों में मान्यता मिली और राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया था, मगर उसके बाद महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में में एक सीट भी नहीं जीत पाए। इन्ही लोगों के चलते सपा का अस्तित्व प्रदेश के अंदर सिमट गया है।

भाजपा ने सपा के इस अंतर्कलह को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को हटाने की मांग शुरू कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को मुलायम और शिवपाल के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे बयानों से आम लोगों की जमीनों पर कब्जा करने वालों को बढ़ावा मिलेगा। केशव ने साफ कह दिया है कि सपा सुप्रीमों की इस स्वीकारोक्ति से भाजपा के आरोपों की पुष्टि हुई है। मुलायम और शिवपाल सरकार के बचाव का एक नया नाटक कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं तो साफ है कि कानून-व्यवस्था तोडऩे वाले मुख्यमंत्री से ज्यादा ताकतवर हो गये हैं। इससे मुख्यमंत्री की गरिमा को आघात लगा है। उन्हें तत्काल कुर्सी छोड़ देनी चाहिए।

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